रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज | मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं - Mirza Ghalib
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज | मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं
Mirza Ghalib